Wednesday, 3 June 2020

हरियाणा के मेवात में होती पाकिस्तान से भी ज्यादा भयानक हालात हिन्दुओं का "खासकर दलितों" का बना कब्रिस्तान, 108 गांव हुए हिंदू विहिन

हरियाणा के मेवात में होती पाकिस्तान से भी ज्यादा भयानक हालात हिन्दुओं का "खासकर दलितों" का बना कब्रिस्तान, 108 गांव हुए हिंदू विहिन :

मेवात में: सार्वजनिक रूप से हिंदुओं का कत्लेआम अब आम बात है, और वहां आए दिन हिंदुओं की बहन और बेटियों के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी की जाती है। हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन हो रहा है। हिंदुओं की बहनें बेटियों को उठा कर ले जातें हैं, उनके साथ बलात्कार होता है, उन्हें धमकाया जाता है। जान से मारने की धमकी दी जाती है। जब वे कुछ कहते हैं या विरोध करते हैं, तो वे हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ करते हैं और उनकी पिटाई करते हैं, यहां तक ​​कि विधवाओं को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। 

प्रेस विज्ञप्ति: इस संदर्भ में, जस्टिस पवन कुमार वहां पहुंचे और इस पूरे मामले की छानबीन की और उन्हें जानकारी मिली कि हिंदुओं के साथ वहां किस तरह की ज्यादती हो रही है, जिसके संबंध में उन्होंने मीडिया के सामने एक रिपोर्ट रखी है। जो दर्शाता है कि आज हरियाणा के मेवात में हिंदुओं की संख्या 108 गांवों से गायब हो गई है और 84 गांवों में हिंदुओं के केवल चार-पांच घर बचे हैं। इसके संदर्भ में, "विहिप" शुरू से ही सरकार और प्रशासन से कार्रवाई करने की मांग कर रहा है और सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा के लिए भी अनुरोध कर रहा है। "विनोद बंसल विहिप महासचिव" ने भी इस पूरे मामले की जानकारी ट्वीट की और इस पूरे विषय की जानकारी सबके सामने रखी। 


मेवात में हिंदुओं पर जिस तरह के अत्याचार हो रहे हैं, वे शायद पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के समान हो सकते हैं। आज की ऐसी घटना को देखकर यह स्पष्ट रूप से मुझे कश्मीर की घटना की याद दिलाता है। कैसे कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादी समुदाय द्वारा बेरहमी से कत्ल किया जा रहा था और उनकी बहन बेटियों को उनके घरों से खींचकर उनके साथ बलात्कार किया जा रहा था। क्या आपको याद है वह घटनाक्रम जब हिन्दुओं को उनके ही घर से बेघर कर दिया गया था। क्या आपको याद है, वह चीखें जब कश्मीर में हिन्दुओं का सरेआम कत्लेआम चल रहा था। सरकार तब भी सोई थी सरकार अब भी सोई है और सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि हिंदु अब भी सोया हुआ है। अभी भी इन कट्टरपंथी मुसलमानों कि इन हरकतों देखते हुए भी, कोई भी अभी तक सही रूप में अपना विरोध दर्ज कराने सामने नहीं आ रहा है। सिर्फ कुछ हिन्दुत्व पार्टियाँ ही है जो सामने आकर अपना आपत्ति दर्ज कराता है और विरोध करता है। अब उन सभी धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदारों का उपवास शुरू हो गया है। दलितों के दूत कहां हैं। क्या कभी कोई इस विषय पर चर्चा करेगा या नहीं। क्या कोई अब दलितों को इन्साफ दिलाएगा। मेरी सलाह: हिन्दुओं अब भी वक्त है जाग जाओ वर्ना देर हो जाएगा। अगर कुछ कर नहीं सकते तो, जो कर रहे हैं उनकों तो आप सपोर्ट कर ही सकते हैं। और इन जिहादी आतंकवादी लोगों से बच के रहें और सचेत रहें और जागे और अपने हक के लिए लड़े, अपने धर्म के लिए लड़े, भारत देश के लिए लड़े, अगर अब भी नहीं जागे तो वह वक्त दूर नहीं जब भारत से भी आपको भगा दिया जाएगा। पहले कश्मीर, फिर केराना, अब मेवात इसी तरह की नई नई घटना सामने आती रहती है जो हमे समझना चाहिए कि ये कट्टरपंथी आतंकवादी लोग किस तरह की साजिश को शिश कर रहे हैं। 

Tuesday, 2 June 2020

अमेरिका में हिंसा की तर्ज पर भारत में दंगा भड़काने की साजिश रची जा रही है

अमेरिका में हिंसा की तर्ज पर भारत में दंगा भड़काने की साजिश रची जा रही है
स्वीडन में प्रोफेसर "अशोक स्वैन" भारत विरोधी पोस्ट कर रहे हैं और देश विरोधी अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। यह खुद को प्रोफेसर कहता है और हिंदू विरोधी लेख लिखता है, जो भारत में मुसलमानों के जीवन के नाम पर दंगा भड़काने की कोशिश करता है।#MuslimLivesMatter नामक हैशटैग को बढ़ावा देता है और मुसलमानों के दिल में भारत विरोधी मानसिकता को पैदा करता है। 

इसमें कुछ भारतीय पत्रकार भी इसका समर्थन करते हैं और कुछ भारत-विरोधी लोग इसमें शामिल होते हैं और #MuslimLivesMatter हैशटैग को बढ़ावा देते हैं ताकि भारत में रहने वाले मुसलमान सड़कों पर आएं और दंगा करें। साथ में #SharjeelOurLeader नाम का हैशटैग भी चलता है और ट्रेंड करवाते हैं। 

भारत विरोधी मानसिकता के लोग 


ये वही लोग हैं जो भारत में अमेरिका की तर्ज पर दंगा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, देशद्रोही सर्जिल इमाम की रिहाई की मांग कर रहे हैं, और ट्विटर पर उसके नाम से ट्रेंड चला रहे हैं। ताकि अमेरिका में मारे गए एक अश्वेत व्यक्ति की तर्ज पर भारत में हिंसा फैल सके। इसलिए देशद्रोही सर्जील इमाम को भी हीरो के तौर पर मुसलमानों के बीच रखा जा रहा है. ताकि मुसलमानों को लगे सर्जील इमाम हमारा हीरो है और वह उसके लिए दंगा फसाद सुरू करदे. भारत में विद्रोह हो, दंगे हो, जिससे इन टुकड़े टुकड़े गैंग का एजेंडा चलता रहे और 
भारत  कभी भी स्थिर ना रहें। इसमे शामिल लोग कुछ बहुत बड़े बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी जिसमें कई पत्रकार भी जो वामपंथी और जिहादी मानसिकता के लोग है जो हमेशा भारत विरोधी मानसिकता वह भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करते रहते हैं कई राजनीतिक पार्टी के सदस्य जो हमेशा भड़काऊ भाषण देते रहते हैं। मेरी सलाह आपसे बस इतना है कि कृपया कर इन जेसे लोगों से बचे वह सावधान रहें वह सतर्क रहें वह अपने बचाव के लिए तत्पर रहें. 

Monday, 1 June 2020

Violence in several US cities, one more death in shootings, 1400 arrested, rallies in London and Berlin: अमेरिका के कई शहरों में हिंसा, फायरिंग में एक और मौत, 1400 गिरफ्तार, लंदन और बर्लिन में रैलियां

अमेरिका के कई शहरों में हिंसा, फायरिंग में एक और मौत, 1400 गिरफ्तार, लंदन और बर्लिन में रैलियां


न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत और पुलिस के हाथों अन्य अश्वेत लोगों की हत्या के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आंच शनिवार को न्यूयॉर्क से लेकर टुल्सा और लॉस एंजिलिस तक फैल गई। कई शहरों में हिंसा और लूटपाट पर काबू पाने के लिए पुलिस ने रबर और आंसू गैस के गोले दागे। अमेरिका के 17 शहरों से लगभग 1400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इंडियानापोलिस में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन के दौरान फायरिंग में एक व्यक्ति मौत हो गई। अमेरिका में उग्र प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए रविवार को लंदन और बर्लिन में रैलियां आयोजित की गईं।

अंतिफा को आतंकी संगठन घोषित करने पर विचार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका धुर वामपंथी संगठन अंतिफा की इन हिंसक प्रदर्शनों में भूमिका को देखते हुए उसे आतंकी संगठन घोषित करने पर विचार कर रहा है। फ्लॉयड की मौत के बाद देशभर में अचानक भड़के हिंसक प्रदर्शनों के लिए ट्रंप प्रशासन इसी अतिवादी संगठन को जिम्मेदार मान रहा है। अटॉर्नी जनरल विलियम पी बर्र ने भी एक बयान में कहा कि हिंसक घटनाएं अंतिफा और अन्य समान समूहों द्वारा भड़काई जा रही हैं और उनके साथ इसी के अनुरूप व्यवहार होगा।


न्‍यूयॉर्क में कई वाहन फूंके

न्यूयॉर्क शहर में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है। अटलांटा, लॉस एंजिलिस, फिलाडेल्फिया, डेनवर, सिनसिनाटी, पोर्टलैंड, ओरेगन, लुइसविले, केंटकी सहित कई प्रमुख शहरों में कफ्र्यू के बावजूद रात भर हिंसक घटनाएं होती रहीं।

प्रदर्शनकारियों पर तीर-धनुष से हमला

साल्ट लेक सिटी में एक व्यक्ति ने प्रदर्शनकारियों पर तीर-धनुष से निशाना बनाया। इसके जवाब में भीड़ द्वारा उस पर हमला किया गया। लॉस एंजिलिस की गलियों में आगजनी की घटनाएं हुई। प्रदर्शनकारियों ने उत्तरी कैरोलिना में अमेरिकी झंडे को तोड़ दिया।

फायरिंग में एक की मौत
इंडियानापोलिस में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा इमारतों को क्षतिग्रस्त करने और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आग के हवाले करने का सिलसिला जारी रहा। यहां पर प्रदर्शन के दौरान हुई फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस अब इन घटनाओं की जांच कर रही है। 

प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पें

सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो में प्रदर्शनकारी मैनहट्टन, टाइम स्क्वायर के फिफ्थ एवेन्यू स्थित ट्रंप टॉवर, कोलंबस सर्किल पर एकत्र होकर फ्लॉयड की मौत का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में न्यूयॉर्क शहर में अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते और उन्हें खदेड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि एक अन्य वीडियो में न्यूयॉर्क पुलिस विभाग की दो कारें प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ती दिखाई दी जो एक अवरोधक को हटा रहे थे और उस पर सामान फेंक रहे थे। यूनियन स्क्वायर के नजदीक एक बड़े वाहन को भी आग के हवाले करने की घटना सामने आई है। 

हिंस के लिए भड़काया

न्यूयॉर्क के मेयर बिल डी ब्लासियो ने ब्रूकलिन में हुए प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि कुछ लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आए थे, लेकिन दूसरे कुछ लोगों ने उन्हें हिंसा के लिए भड़काया। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शन से संबंधित कुछ वीडियो देखे हैं। यह शहर की विचारधारा और मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। न्यूयॉर्क प्रांत के गवर्नर एंड्रयू कुओमो ने कहा, 'अमेरिका का इतिहास नस्लवाद और भेदभाव से भरा पड़ा है। यही सच्चाई है। इस आक्रोश और हताशा के पीछे यह बड़ी वजह है। मैं प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा हूं, लेकिन हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं है।'

एक्टर केंड्रिक सैंपसन को पीटा

कुओमो ने कहा कि उन्होंने न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल से बात की है और प्रदर्शन के दौरान लोगों द्वारा की गई हिंसा और पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की स्वतंत्र जांच करने को कहा है। उधर, लॉस एंजिलिस में हुए एक प्रदर्शन में भाग ले रहे हॉलीवुड एक्टर केंड्रिक सैंपसन को पुलिस द्वारा पीटे जाने और रबर की बुलेट मारे जाने की बात सामने आई है।

प्रदर्शनकारियों के निशाने पर मीडिया के लोग

पूरे अमेरिका में हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा पर उतारू भीड़ के निशाने पर प्रमुख रूप से मीडिया के लोग हैं। शनिवार को व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शनकारियों ने फॉक्स न्यूज के एक रिपोर्टर लेलैंड विटरेट को पीट दिया। हमले से परेशान विटरेट ने कहा कि उन्हें उनके मीडिया आर्गेनाइजेशन की वजह से निशाना बनाया गया। शनिवार को ही कोलंबिया में टीवी रिपोर्टर पर ईट से हमला किया गया था। जबकि मिनीपोलिस में तो एक पत्रकार की जांघ में रबर की बुलेट आकर लगी थी। पीट्सबर्ग में एक टीवी कैमरामैन प्रदर्शनकारियों द्वारा पीटे जाने की बात कही है।

प्रदर्शनकारियों की भीड़ में पिकअप ट्रक घुसा

फ्लोरिडा के टाल्हासी में शनिवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ में एक पिकअप ट्रक घुस गया जिससे लोगों में भगदड़ मच गई। हालांकि एक बड़ा हादसा टल गया। वीडियो में नजर आ रहा है कि ट्रक यातायात बत्ती पर रुका तो प्रदर्शनकारी उसके आसपास जमा हो गए, कुछ लोग वाहन चालक से बात करने लगे। इसके बाद एक अन्य वीडियो में दिखा कि ट्रक की खिड़की पर एक बोतल मारी गई और ट्रक की गति अचानक से बढ़ गई और हड़बड़ाए लोग एक ओर हो गए। इस घटना में कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।

प्रदर्शनकारियों की जमानत के लिए हॉलीवुड आगे आया

प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की जमानत के लिए हॉलीवुड की कई हस्तियां और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन का स्टाफ आगे आया है। बता दें कि फ्लॉयड की मौत के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के दौरान अभी तक 1400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्या था मामला

मिनीपोलिस में इस सप्ताह तब प्रदर्शन भड़क उठे जब एक वीडियो में पुलिस अधिकारी को आठ मिनट से अधिक समय तक घुटने से जार्ज फ्लॉयड की गर्दन दबाते देखा गया। बाद में चोटों के कारण फ्लॉयड की मौत हो गई। अश्वेत फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।

विशेषज्ञ कोरोना फैलने की जता रहे आशंका

मास्क पहने या शारीरिक दूरी का पालन किए बिना बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता पैदा हो गई है कि इससे कोरोना वायरस महामारी फिर से फैल सकती है। वह भी ऐसे समय जब देशभर में इससे मरने वाले लोगों की संख्या में कमी आई और अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने की कोशिशें चल रही हैं।

छह प्रांतों ने नेशनल गार्ड बुलाए

स्थिति पर नियंत्रण के लिए छह प्रांतों ने नेशनल गार्ड को बुलाया है। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट ओ ब्रायन ने कहा कि संघीय तौर पर नेशनल गार्ड को तैनात करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मेयर और गवर्नर के अनुरोध पर उन्हें भेजा जाएगा।

लंदन, बर्लिन में प्रदर्शन

अमेरिका में उग्र प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए रविवार को लंदन और बर्लिन में रैलियों का आयोजन किया गया। लंदन के टै्रफल्गर स्क्वायर पर एकत्रित हुए प्रदर्शनकारी 'न्याय नहीं तो शांति नहीं' का नारा लगा रहे थे। इसके बाद उन्होंने संसद से पदयात्रा निकाली जो अमेरिकी दूतावास पर जाकर खत्म हुई। इसी तरह बर्लिन में अमेरिकी दूतावास के सामने सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। वे पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था-जॉर्ज फ्लायड को न्याय दो, हत्या बंद करो और अगला कौन?

नस्ली समानता का समर्थन करता है गूगल

गूगल ने कहा है कि वह नस्ली समानता का समर्थन करता है। गूगल के भारतीय-अमेरिकी सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि आज यूएस गूगल और यूट्यूब के होम पेज के जरिये हम नस्ली समानता का समर्थन करते हैं और अश्वेत समुदाय के पक्ष में खड़े हैं। हम जॉर्ज फ्लॉयड, ब्रेओन्ना टेलर, अहमद आर्बेरी और अन्य को याद करते हैं, जिनकी आवाज दबा दी गई। गायिका लेडी गागा ने भेदभाव खत्म करने की मांग करते हुए कहा कि यह बदलाव का समय है।

China spread fake news and Pakistan helped in this false propaganda

China spread fake news and Pakistan helped in this false propaganda

This is a confirmed FAKE photo. This fake image is being spread by both Chinese and Pakistani trolls.

Major Gaurav Arya confirmed this and made the information available to the public. This was first confirmed by Major General Harsha Kakar. 

This news has been spread by the fake web media of China, in which the troller of Pakistan is also involved. Due to China not being able to tolerate its frustration, it now wants to hurt the sentiments of Indian soldiers by spreading false news against India with the help of fake news. And this news has nothing to do with reality. The reason for this Chinese propaganda is COVID19, as world communities are under pressure on China. At the same time, America's action, because of which China is worried. The US has supported Hong Kong and Taiwan to pressure China. To break the morale of India and to heal the wounds of the Indian public, China and Pakistan together are resorting to false news so that India becomes weak in its own territory, Indian soldiers can spread fear among the people. But China does not know that it is not 1962 India. China should forget that pressure on India can scare India, India is a peace loving country and India never attacks any country before. This does not mean that anyone can harm India's sovereignty. China should understand that India is not among those countries that are afraid of China. China also knows that only India can compete with China in this area. 

This is a picture of an accident when Chinese soldiers were helping the crashed Indian soldiers.

The rope was tied in the leg, because there was too much injury to his leg. Therefore, this rope was tied to avoid movement to the legs. And this picture is not of Pengyong, where the dispute is going on. See the color of the land it is different.  The vehicle fell into the river bottom.

But there are some Paid journalists who specialize in spreading such fake news in India. Those who spread such false news.




Saturday, 30 May 2020

30 जून तक के लिए बढ़ाया गया LOCKDOWN, गाइडलाइंस जारी, जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा

देश में लॉकडाउन को 30 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है. सरकार ने गाइडलाइंस जारी कर दी है.

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने शनिवार को देश के कंटेनमेंट जोन में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 30 जून तक बढ़ाने की घोषणा की. साथ ही कहा कि आठ जून से हॉस्पिटैलिटी सर्विस, होटलों और शॉपिंग मॉल को खोलने की अनुमति होगी. केंद्र ने लॉकडाउन में और अधिक छूट संबंधी शनिवार को जारी नए दिशा-निर्देशों को लॉकडाउन हटाने का प्रथम चरण (अनलॉक 1) बताया है. देश में 25 मार्च से जारी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का चौथा चरण 31 मई को समाप्त हो रहा है. 

लॉकडाउन तीन चरणों में होगा. ग्रीन, रेड और ऑरेंज जोन की कैटेगरी को खत्म करके सिर्फ एक जोन होगा. यह जोन कंटेनमेंट जोन होगा. कंटेनमेंट जोन में फिलहाल कोई छूट नहीं मिलेगी. 8 जून से सभी धार्मिक स्थलों को खोला जा सकेगा. मास्क लगाना जरूरी है.  

दिशा-निर्देश में कहा गया है कि सार्वजनिक धार्मिक स्थलों, होटलों, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल और अन्य आतिथ्य सत्कार सेवाएं भी आठ जून से शुरू हो जाएंगी. केन्द्रीय गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा, मेट्रो ट्रेनों, सिनेमा हॉल, जिम, राजनीतिक सभाओं आदि को शुरू करने का निर्णय परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाएगा. 

दिशा-निर्देश मे कहा है कि स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, प्रशिक्षण और कोचिंग संस्थानों को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ सलाह के बाद खोला जाएगा. उसमें कहा गया है कि राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश शिक्षण संस्थानों को जुलाई से खोलने के संबंध में अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों के साथ चर्चा कर सकते हैं.  

लॉकडाउन 5.0 में मिलेंगी ये रियायतें:

-8 जून के होटल और मॉल खुलेंगे.
-एक से दूसरे राज्य में जाने के लिए पास की जरूरत नहीं है.
-दूसरे चरण में स्कूल कॉलेज इंस्टीट्यूट खोले जाएंगे.
स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा गया.
-देशभर में कहीं भी आने जाने पर रोक नहीं.

ये पाबंदियां जारी रहेंगी:

- दिल्ली मेट्रो फिलहाल नहीं चलेगी
- रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा.
- विदेश यात्रा पर पाबंदी जारी रहेगी.
- अंतिम संस्कार में 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे.
- दुकानों पर सिर्फ 5 लोग एक साथ सामान ले सकेंगे.
- सिनेमा हॉल, जिम और स्वीमिंग पूल बंद रहेंगे. 


ट्रंप ने चीन के छात्रों और शोधकर्ताओं के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध, जानें वजह

कोरोना वायरस की महामारी से अमेरिका काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है. इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने देश में चीन के छात्रों के अध्ययन पर रोक लगा दी है. इसके पीछे की वजह भी उन्होंने बताई है.
चीन से दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा अमेरिका को नुकसान पहुंचाया है. जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन पर लगातार वार करते दिख रहे हैं. ट्रंप को कोरोना वायरस को 'चीनी वायरस' कहते हुए भी सुना गया. इस बीच अब राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त कदम उठाते हुए अमेरिका में चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है.

क्या है इस बैन की वजह?

ट्रंप का कहना है कि उन्होंने चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से संबंध रखने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं को देश में आने और किसी भी तरह की शिक्षा ग्रहण करने से रोक लगाई है. उनका कहना है कि अमेरिका से बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हासिल करने के लिए चीन की पीएलए स्नातक छात्रों का इस्तेमाल कर रही थी. इसे रोकने के लिए उन्होंने यह सख्त कदम उठाया है.
हालांकि, माना जा रहा है कि चीन से फैली कोरोना वायरस की महामारी, हांगकांग में की गई बीजिंग की कार्रवाई और विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अमेरिका काफी नाराज चल रहा है. इससे तंग आकर डोनाल्ड ट्रंप ने यह कदम उठाया है.

शुक्रवार को घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा, ''चीन ने अपने विशाल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के आधुनिकीकरण के लिए संवेदनशील अमेरिकी प्रौद्योगिकियों और बौद्धिक संपदा का अधिग्रहण करने के लिए एक व्यापक रूप से अभियान में चला रखा है.''

अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार चीन की इन नीतियों को रोकना जरुरी है, अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो अमेरिका को आने वाले समय में आर्थिक शक्ति के रूप में काफी नुकसान हो सकता है. उनके मुताबिक, चीन की पीएलए बौद्धिक संपदा को बढ़ाने के लिए परास्नातक और शोधकर्ताओं का इस्तेमाल कर रही है. जिसे देखते हुए उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई या शोध करने के लिए 'एफ-1' या 'जे-1' वीजा मांगने वाले कुछ चीनी नागरिकों का प्रवेश को अमेरिका के हितों के लिए खतरनाक बताते हुए रोक दिया है.

ट्रंप के उठाए गए इस कदम पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, ''इस तरह के फैसले से दोनों के बीच आपसी रिश्ते काफी हद तक खराब हो सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अमेरिका में चीनी छात्रों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन न करें.''

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हरियाणा के मेवात में होती पाकिस्तान से भी ज्यादा भयानक हालात हिन्दुओं का "खासकर दलितों" का बना कब्रिस्तान, 108 गांव हुए हिंदू विहिन

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